CHALO AAJ THODA KAL KI BAAT KARTE HAI....

चलो आज थोड़ा कल की बात करते है.... 
जो बिन बताए गुजर गया ,
चलो उस पल की बात करते है। ... 

एक वक़त था वो जब हम दौड़े  चले आते थे 
बस किसी को एक नजर देखने देखने के खातिर ।
कई बार चक्कर काटते थे। ... . 

पर अब इंतजार नहीं होता ,
अब उतना वक़्त आपने पास अब नहीं होता ,
वो झिझक  , वो सरम , ....... 
सब बहोत याद आता है ,
चलो इस तपन में। .... 
उस ठंडक की बात करते है।  
जो बिन बताए गुजर गया उस कल की  करते है ,
आज ढोड़ा कल की बात करते है. .... 


नहीं मिलती वो रोटियां 
जिनमे हॉस्टल के प्यार की खुसबू थी ,
और आज इन सारि  गाड़ियों के बिच वो मोटरसिकिल , 
जो अपना  रुतबा बढाती थी। ...... 


वो हाँथ के खिलोने ,
वो हाफ पैंट, ..... वो घडी 
सब बहोत याद  है। ... 
चलो आज ये कॉफी छोड़ कर 
थोड़ी देर ही सही पर उस नुक्कड़ की बात करते है......
जहा हम दोस्त बैठा करते थे , 
जो पल बिन बताए गुजर गया उस पल की बात करते है। .....


जो माँगा था वो तो मिल गया 
पर शायद उस दौड़  में मेरा बचपन छीन गया , 
वो कभी न थकने वाला पल छीन गया 
वो फुरसत से बात करना छीन गया....... 



वो बस में खिड़की की तरफ बैठने की जिद 
वो किताबो में  किताबों वाला जिद ,
सब बहोत याद आता है ,
चलो न  ब्रेकिंग न्यूज़ छोड़ कर 
उस पुराने अखबार की बात करते है , ...... 

जब भी वहां जाता जाता हूँ  , तो देखता हूँ ,
वो स्कूल की पुरानी खिड़की
मैं छाक्ते हुए देखता हों खुद को  , उन खिड़कियों से। 


वो हाँथो  में समेटे हुए उन चाक के टुकड़े 
वो घर जाने की बेसब्री , 
सब बहोत याद आता है , 
क्यों न थोड़ी देर ही सही 
पर चलो एक बार खुदसे मिलने चलते है ,........ 


चलो थोड़ा कल की बात करते है.  ........ 





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